Saturday, November 10, 2018

मालवा में बाग़ी बिगाड़ रहे हैं बीजेपी-कांग्रेस दोनों के समीकरण

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नीमच नामांकन पत्र दाख़िल करने की तारीख़ बीतने के साथ ही नीमच मंदसौर ज़िले में चुनाव का सीन साफ हो गया है. भाजपा और कांग्रेस दोनों बड़े दल बगावत से जूझ रहे हैं. लेकिन एक बात ध्यान देने की है कि, बीजेपी में पिछड़े वर्ग के नेता बगावत कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में सवर्णो के बागी स्वर है. अगर ये बाग़ी मैदान में डटे रहे तो दोनों दलों का खेल बिगड़ जाएगा.
बीजेपी में नीमच से पूर्व विधायक स्व.खुमान सिंह शिवाजी के बेटे सज्जन सिंह चौहान ने बगावत कर दी है. वो सोंधिया समाज के हैंं. इस समाज के करीब दस हज़ार वोट हैं. फिर स्व.शिवाजी का बड़ा नाम है. उन्होंने सात चुनाव विधान सभा चुनाव लड़े और पांच बार विधायक रहे. यहीं से मेनारिया ब्राह्मण और विहिप के पूर्व जिला संयोजक बाबूलाल नागदा भी मैदान में आ गए हैं. इनकी बिरादरी और सकल ब्राह्मण समाज के लोगों को मिलाकर पंद्रह हज़ार वोट हैं. जावद से कद्दावर भाजपा नेता पूर्ण अहीर ने भी निर्दलीय पर्चा भरा है. उनका ज़मीनी आधार बेहद मज़बूत है.  अगर वो मैदान में टिके तो भाजपा की मुश्किल बढ़ सकती है.

बीजेपी में दूसरा बड़ा रिवोल्ट गरोठ में हुआ. यहां से वर्तमान विधायक चन्दर सिंह सिसौदिया को टिकट नहीं मिला तो वो बाग़ी हो गए. यहां उनके सोंधिया समाज के तीस हज़ार से अधिक वोट हैं. वो पार्टी को बड़ी चुनौती दे सकते है. पार्टी ने यहां से देवीलाल धाकड़ को उम्मीदवार बनाया है. सुवासरा में भी बीजेपी नेता गोपाल काला ने बगावत का बिगुल बजा दिया है. वो पोरवाल समाज से हैं और इस समाज के यहां बीस हज़ार वोट हैं.

यदि कांग्रेस की बात करें तो जावद से समंदर पटेल बाग़ी हो गए. यहां 20 हजार पटेल वोट हैं.  ये वोटर कटटर भाजपा के माने जाते हैं इसलिए हो सकता है इसका नुकसान भाजपा को अधिक हो. जबकि नीमच से मधु बंसल ने ताल ठोंक दी है. वो कारोबारी हैं और इस समाज के यहाँ पंद्रह हज़ार वोट हैं. सुवासरा सीतामऊ से कांग्रेस के जिला कार्यवाहक अध्यक्ष ओम सिंह भाटी ने पूरे दमखम से बागी पर्चा भरा. यहां राजपूत वोट  तीस हज़ार हैं. सभी ने एकमत होकर भाटी को उम्मीदवार घोषित किया.
कांग्रेस की जिला कार्यवाहक अध्यक्ष और नीमच से बागी चुनाव लड़ रहे मधु बंसल का कहना है पार्टी आलाकमान ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है. उन नेताओ को उम्मीदवार बनाया गया जिन्होंने पार्टी से बगावत की और पार्टी को हराया.
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