Monday, May 14, 2018

MP Board Results 2018 : निजी की बजाए सरकारी स्कूलों का रहा बेहतर प्रदर्शन

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भोपाल: मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने दसवीं व बारहवीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। दसवीं का रिजल्ट 66.54 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल की तुलना में 16.68 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, बारहवीं का रिजल्ट 68.07 प्रतिशत रहा।

10वीं में पहले स्थान पर दो विद्यार्थी रहे, शाजापुर के हर्षवर्धन परमार और विदिशा की अनामिका साध ने पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं, जबलपुर के 12वीं एक होनहार दिव्यांग छात्र राजेश ओझा ने मेरिट लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। राजेश जन्म से देख नहीं सकते बावजूद इसके उन्होंने आर्ट विषय में सूची में स्थान हासिल किया है। राजेश की इस उपलब्धि के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सीएम हाउस में सम्मनित किया।

इस साल करीब 20 लाख छात्र-छात्राओं ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा दी थीं। कक्षा 12वीं के 7,69,000 विद्यार्थी और 10वीं के 1,14,800 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे। 12वीं की परीक्षाएं 1 मार्च से 3 अप्रैल और 10वीं की परीक्षाएं 5 मार्च से 31 मार्च तक चलीं थीं। 12वीं की परीक्षा में विदिशा के संयम जैन ने टॉप गणित संकाय किया है, जबकि हिमांशु शर्मा दूसरे नंबर पर रहीं। वहीं, तीसरे स्थान पर अदिति जैन रहीं।

एमपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट की खास बातें-

  • 10वीं और 12वीं के कुल मिलाकर 283 छात्र-छात्रों ने टॉप 10 मेरिट में अपनी जगह बनाई है।
  • 12वीं में 68 फीसदी स्टूडेंट्स पास हुए हैं। जिनमें 64 फीसदी छात्र और 69 फीसदी छात्राएं हैं।
  • 10वीं का परिणाम 66 फीसदी है। जो पिछले साल की तुलना में 16.68 प्रतिशत ज्यादा है। 10वीं में भी छात्राओं ने बाजी मारी है।
  • 12वीं में प्रदेश में सबसे अच्छा रिजल्ट नीमच का रहा है।
  • छिंदवाड़ा की शिवानी ने 12वीं आर्ट्स में 95.2 फीसदी अंक हासिल कर टॉप किया है।
  • शिवपुरी के ललित पंचोली ने 98.4 फीसदी हासिल कर विज्ञान (गणित) में टॉप किया है।
  • 12वीं कॉमर्स में 95.7 फीसदी अंकों के साथ आयुषी धेंगुला टॉपर रहीं।
  • संतोष रावत ने 95 फीसदी अंकों के साथ कृषि विषय में टॉप किया है।
  • 10वीं में हर्षवर्धन परमार और अनामिता ने टॉप किया है।
  • सरकारी स्कूलों का रिजल्ट निजी स्कूलों के बजाए काफी अच्छा रहा।

वहीं, इससे पहले सीएम शिवराज ने ट्वीट कर घोषणा की है कि 12वीं में 70% से अधिक अंक लाने वाले बच्चों की उच्च शिक्षा की पूरी फीस प्रदेश सरकार भरवायेगी। सीएम ने ट्वीट में लिखा है कि अब हमने एक फैसला और किया है कि जो परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन परिवारों के बच्चों के लिए 70% अंकों की शर्त भी अनिवार्य नहीं रहेगी।
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