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Wednesday, June 19, 2019

जागरूकता ही सिकल सेल से बचने का उपाय – श्री बघेल : विश्व सिकल सेल दिवस

जागरूकता ही सिकल सेल से बचने का उपाय – श्री बघेल : विश्व सिकल सेल दिवस

रायपुरमुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने लोगों को सिकल सेल के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनजागरूकता से ही इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्व सिकल सेल दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में कहा है कि छत्तीसगढ़ में एक बड़ी आबादी इस बीमारी से पीड़ित है। यह एक आनुवांशिक बीमारी है। इस बीमारी से पीड़ित माता-पिता से ही यह अगली पीढ़ी तक पहुंचती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम अपने परिवार, समुदाय और प्रदेश के लोगों को जागरूक कर ही सिकल सेल से बच सकते हैं। उन्होंने इसका प्रसार रोकने विवाह के पूर्व वर-वधू का रक्त परीक्षण अनिवार्य रूप से कराने कहा। उन्होंने कहा कि सिकल सेल के समुचित प्रबंधन, खान-पान और सही जीवन शैली अपनाकर इसके रोगियों का जीवन लंबा और सुखदायी बनाया जा सकता है। सिकल सेल की जांच गर्भ में पल रहे शिशु से लेकर युवावस्था तक कभी भी की जा सकती है।

Monday, June 17, 2019

परिवर्तन तभी सार्थक है जब उसे स्वीकार करने की सामर्थ्य हो :भूपेश बघेल

परिवर्तन तभी सार्थक है जब उसे स्वीकार करने की सामर्थ्य हो :भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने परिवर्तन संस्था के कार्यक्रम में समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित किया

रायपुर- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि किसी भी समाज में परिवर्तन तभी सार्थक होता हैं, जब उस समाज में परिवर्तन को स्वीकार करने का सामर्थ्य हो। मुख्यमंत्री आज नई दिल्ली में परिवर्तन संस्था द्वारा आयोजित समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल करने वाले प्रतिभाओं के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के पिता श्री नंदकुमार बघेल और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे।
    
    मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य, संस्कृति और समाज के क्षेत्र में जो कार्य किये जाते हैं, वो चिरस्थायी प्रकृति के होते हैं। यह कार्य दर्शाते है कि समाज में तत्कालीन समय में क्या घटित हो रहा है और उसका समाज पर किस प्रकार प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारा समाज कर्मठ समाज है तथा हमेशा संघर्ष के लिए तत्पर रहता है और संघर्ष से ही आगे बढ़ा है।

    उन्होंने कहा कि इस देश में हो रहे परिवर्तन और उसे आगे बढ़ाने में युवाओं की महती भूमिका है। छत्तीसगढ़ के गठन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने श्री खूबचंद बघेल और श्री चन्दूलाल चन्द्राकर सहित सभी महापुरूषों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि अगर एकजुट होकर कोई भी प्रयास किया जाये तो सफलता अवश्य मिलती है।
    श्री बघेल ने कहा कि हमारा समाज स्वाभिमानी समाज है और जब छत्तीसगढ़ में किसान का पुत्र मुख्यमंत्री बना तो उसने सबसे पहले जो निर्णय लिए वो किसानों के ही हित में थे। उन्होंने कहा कि कृषि से बड़ा कोई रोजगार अन्य सेक्टर नहीं दे सकता।
    उन्होंने कहा कि अनाज के साथ साथ हमें रोजगार के क्षेत्र में भी स्वालंबी बनना होगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना का जिक्र करते हुए बताया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए जमीनी स्तर पर इसे क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने सभी प्रतिभाओं को बधाई और शुभकामनायें देते हुए कहा कि उन्हें समाज के उत्थान में अपना योगदान देना चाहिए ताकि दूसरे लोग भी उनका अनुसरण कर सके।

Saturday, June 15, 2019

 छत्तीसगढ़ की ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ योजना दिखायेगी देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास का नया रास्ता - श्री भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ की ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ योजना दिखायेगी देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास का नया रास्ता - श्री भूपेश बघेल


  नीति आयोग की नई दिल्ली में हुई गर्वनिंग कांउसिल की बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने
 ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवन के लिए ठोस पहल करने की बात कही

  • आकांक्षी जिलों के विकास के लिए शत-प्रतिशत वित्त पोषण और अनुदान
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और रोजगार पर विशेष जोर
  • नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का पुनराविलोकन हो
  • सार्वजनिक उपक्रमों को आवंटित खदानों से राज्य को मिले बिजली का हिस्सा
  • अतिरिक्त उपार्जित चावल को केन्द्रीय पूल में मान्य करे
  • हर घर को नल कनेक्शन प्रदान करने के लिए शत प्रतिशत अनुदान दे
रायपुर, मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने कहा कि देश में किसानों की आय दुगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ में हाल ही में लागू ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ योजनाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के विकास के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की ठोस पहल की आवश्यकता हैं और छत्तीसगढ़ इस मामले में देश को रास्ता दिखा सकता हैं। श्री बघेल शनिवार को नई दिल्ली में नीति आयोग की गर्वनिंग कांउसिल की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की। बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित थे।  
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी’ योजनाओं की के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने, स्थानीय संसाधनों को विकसित करने और व्यापक तौर पर पर्यावरण संरक्षण को को ध्यान में रखकर यह कार्यक्रम प्रारंभ किया गया हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, गिरता भू-जल स्तर, पशुधन संवर्धन, जैविक खेती जैसे विषय आज वैश्विक चिंता के कारक बन गए है। छत्तीसगढ़ में हमने विभिन्न समस्याओं के एक समाधान के रूप में नवाचार किया हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी भाषा में नरवा का अर्थ है प्राकृतिक नाले, गरवा का अर्थ हैं पशुधन, घुरवा का अर्थ है अपशिष्ट पदार्थो का भण्डार और बाड़ी का अर्थ है छोटी बागवानी। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत हम भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नाले में बहते पानी को रोकेंगे, गाय तथा गौवंशीय पशुधन को बचायेंगे तथा इनका  किसानों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उपयोग सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही गोबर तथा अन्य जैविक ग्रामीण अपशिष्ट पदार्थो से कम्पोस्ट खाद का निर्माण एवं बाड़ी अर्थात हर किसान तथा ग्रामीण के यहां छोटे बगीचों का विकास करेंगे ।
बैठक में मुख्यमंत्री श्री बघेल ने राज्य में आकांक्षी जिला कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मे 44 प्रतिशत वन है जिसमें मुख्य रूप से 10 आकांक्षी जिलों के 8 जिलों में वनों का प्रतिशत बहुत अधिक है। इन जिलों में बिजली, पानी, सड़क और सिचाई आदिवासियों तक पहुचाना बहुत कठिन हो गया है। श्री बघेल ने इन क्षेत्रों में सोलर बिजली के माध्यम से पानी के पम्प की व्यवस्था, बिगड़े वन क्षेत्रों में वाणिज्यिक रूप से सोलर बिजली उत्पादन की अनुमति, लघुवनोपज पर आधारित उद्योगों की स्थापना वन भूमि पर करने की छूट, सोलर पम्पों के माध्यम से छोटी सिचाई योजनाओं की स्थापना के लिए वन भूमि में छूट, आदिवासी बेरोजगार युवकों को लघुवनोपज एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए अनुदान आदि के लिए केन्द्र सरकार से 100 प्रतिशत वित्त पोषण एवं अनुदान की मांग की।  
     बैठक में मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि देश में माओवादी उग्रवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति तथा समन्वित नीति बने। प्रभावित राज्य सरकारों की उसमें समुचित भूमिका हो ताकि ऐसी हिंसा के खिलाफ प्रदेश एकजुट होकर समन्वित कार्यवाही करें। उन्होंने माओवादियों की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास’ की नीति का भी पुनराविलोकन करने की भी मांग की। उन्होेंने कहा कि कई बड़े नक्सली जो केन्द्रीय कमेटी स्तर के हैं, वे 25-35 वर्षों तक हिंसक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं और बीमारियों से ग्रसित होकर या बढ़ती उम्र के कारण आत्मसमर्पण करते हैं। वर्तमान नीति के कारण वे अंततः सजा पाने से बच निकलते हैं। उन्होंने कहा कि माओवाद हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में समुचित विकास कार्यों व रोजगार की आवश्यकता अनुरूप पर्याप्त आर्थिक सहायता से ही हम स्थानीय बेरोजगार युवाओं को भ्रमित होने से बचा सकेंगे। इसमें भारत सरकार को सकारात्मक रूप से विचार करना चाहिए।
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में माओवाद हिंसा से प्रभावित क्षेत्रांे में सड़क निर्माण की प्रगति, ऑप्टिकल फाइवर कनेक्टिविटी, सुरक्षा बलों के लिए टेक्टिकल मिनी यूएव्ही, बस्तर में रेल लाइन के विकास कार्य में तेजी लाने, वंचित संस्थाओं को खाद्यान्न आवंटन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार लाने, फूड सब्सिडी, महात्मा गांधी नरेगा में आवटंन की समस्या, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), गोबर-धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), स्टैंड-अप इंडिया योजना, सूखे की स्थिति एवं राहत के उपाय तथा कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर भी अपनी बात कही। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक ने की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर, मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल से आज सवेरे यहां मंत्रालय में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक श्री राजीव राय भटनागर ने सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भी भेट किया।
छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए हर वर्ष थीम निर्धारित कर कार्य करने पर बल : कलाकार परिषद बनाने पर भी विचार-विमर्श

छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए हर वर्ष थीम निर्धारित कर कार्य करने पर बल : कलाकार परिषद बनाने पर भी विचार-विमर्श


मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल तथा राज्य के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने आज यहां महानदी भवन मंत्रालय में संस्कृति, धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास, पुरातत्व और पर्यटन विभाग की समीक्षा की। इस अवसर पर जहां छत्तीसगढ़ के संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया, वहीं छत्तीसगढ़ की कला और कलाकारों को बढ़ावा देने के उद्ेश्य से कलाकार परिषद बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया। छत्तीसगढ़ की संस्कृति के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु हर वर्ष एक थीम निर्धारित कर कार्य करने पर भी बल दिया गया।
बैठक में संस्कृति मंत्री ने बताया कि राज्य में धर्मस्व और धार्मिक न्यास का कोई सेटअप नही हैं। बैठक में इस दृष्टि से संस्कृति, धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास का संयुक्त सेटअप बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

संस्कृति मंत्री ने बताया कि हाल ही में उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों, साहित्यकारों, छत्तीसगढ़ी फिल्म के निर्माताओं, निर्देशकों और फिल्म कलाकारों के साथ मुलाकात की है। उनसे छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए है।
संस्कृति मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के प्रचार-प्रसार एवं बढ़ावा देने की दृष्टि से संस्कृति विभाग परिसर में संचालित गढ़कलेवा की तर्ज पर राज्य के सभी जिला मुख्यालय में गढ़कलेवा की स्थापना का प्रस्ताव है। इसी तरह छत्तीसगढ़ हाट की तरह बस्तर एवं सरगुजा हाट बनाने का भी विचार है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी के 150वीं जयंती पर किए जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी ली। संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गांधी फाउण्डेशन के सहयोग से आगामी माह संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। बैठक में छत्तीसगढ़ के विभूतियों की जानकारी भी विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को देने का निर्णय लिया गया। छत्तीसगढ़ के संस्कृति विभाग तथा निजी संस्थाओं के सहयोग से ख्याति प्राप्त कलाकार स्वर्गीय श्री खुमान साव पर आधारित श्रद्वांजली कार्यक्रम करने का भी निर्णय लिया गया।
बैठक में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले मेला-मड़ई का प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में 73 मेला, उत्सव और महोत्सव आयोजित किए जाते है और इसके लिए दो करोड़ रूपए 46 लाख रूपए का अनुदान दिया जाता है।
संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ के कलाकारों की पहचान एवं परिचय के लिए चिन्हारी योजना संचालित है, जिसके माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन किया जाता है। संस्कृति के विभिन्न आयामों का प्रचार-प्रसार हेतु सहपीडिया सहयोग लिया जा रहा है। इसी तरह कलाकार पेंशन योजना भी संचालित है। इसी तरह ग्राम जामराव के उत्खनन कार्यो की भी जानकारी दी।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, आयुक्त सह संचालक श्री अनिल साहू सहित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण का जिम्मा  स्थानीय युवकों को दिया जाए :मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण का जिम्मा स्थानीय युवकों को दिया जाए :मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने  महानदी भवन (मंत्रालय) में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक ली। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि- युवाओं को रोजगार देना राज्य सरकार की प्राथमिकता हैं, विशेषकर नक्सलवाद से मुकाबले के लिए स्थानीय युवकों को काम देना आवश्यक है। इसके लिए बस्तर सहित अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण कार्य का जिम्मा वहां के स्थानीय युवकों को ही दिया जाए। वहां के प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन सड़कों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उस क्षेत्र के युवकों को या उनके समूह को बनाने का काम दिया जाए। साथ ही पैंच वर्क या मरम्मत कार्य भी उन्हें ही सौंपे जाए। इसका निरीक्षण विभाग के अभियंता तथा अन्य तकनीकी अधिकारियों द्वारा किया जाए। इससे स्थानीय युवकों को स्वरोजगार मिलेगा, उनकी आय बढ़ेगी और वे मुख्यधारा से जुड़ेगें। मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण के लिए निर्धारित शर्तों में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों सहित समस्त निर्माण कार्यों में किसी हाल में गुणवत्ता से समझौता किया जाए। जो समय-सीमा तय की जाए, उसके भीतर ही कार्य पूर्ण किया जाए। गुणवत्ता के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय किए जाए और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाए।
श्री बघेल ने समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि रायपुर और दुर्ग के मध्य यातायात के दबाव को कम करने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर टाटीबंध और चरौदा-भिलाई के मध्य एक समानांतर सड़क बनायी जाए, इससे सड़क दुर्घटना में भी कमी आयेगी। उन्होंने कहा कि फारेस्ट क्लियरेंस और भू-अर्जन के प्रकरणों के निराकरणों में काफी समय लगता है। इसके लिए संभागायुक्त नियमित अंतराल में बैठक लेकर विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए प्रकरणों का समाधान करें और इसकी जानकारी राज्य सरकार को दे। 
बैठक में उपस्थित लोक निर्माण मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य कार्य में आने वाली कठिनाईयों दूर करना तथा बेहतर निर्माण कार्य के लिए रणनीति तैयार करना है। श्री साहू ने कहा कि निर्माण कार्य समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में टेंडर प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए, ताकि अधिक-से-अधिक स्थानीय लोग भागीदारी कर सके। 
बैठक में बताया गया कि प्रत्येक संभाग में एक वर्ष के भीतर सभी शासकीय कार्यालयों जैसे- अस्पताल, महाविद्यालय भवन तथा अन्य शासकीय भवनों में रेन वाटर हॉर्वेस्टिंग का कार्य पूर्ण लिया जाएगा। अभी तक 448 भवनों में रेन वाटर हॉर्वेस्टिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया हैं। 
अधिकारियों ने बताया कि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्युदर को कम करने के लिए एशियन विकास बैंक (ए.डी.बी.) की सहायता से मार्गों में तकनीकी सुधार का कार्य किया जाएगा। जिस पर सहमति प्रदान की गई। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि सामान्य मरम्मत के अंतर्गत पेच रिवेयर के कार्य हेतु वर्षा ऋतु में एजेंसी तय कर माह अक्टूबर से पेच रिपेयर का कार्य किया जाएगा। वार्षिक संधारण के अंतर्गत इस वर्ष लक्ष्य के स्वरूप में परिवर्तन कर संधारण अंतर्गत नवीनीकरण की 75 प्रतिशत राशि ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य जिला मार्ग एवं ग्रामीण मार्गों पर व्यय की जाएगी।
बैठक में अपर मुख्य सचिव सी.के. खेतान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, लोक निर्माण विभाग के ओ.एस.डी. श्री अनिल राय, ई.एन.सी. श्री डी.के. अग्रवाल, छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम के महाप्रबंधक श्री जी.एस. सोलंकी, लोक निर्माण विभाग के सभी प्ररिक्षेत्र के मुख्य अभियंता तथा अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

Wednesday, February 27, 2019

रफी एहमद किदवई एजुकेशन सोसायटी द्वारा 3 दिवसीय विज्ञान पर अधारित प्रशिक्षण का कार्यक्रम किया गया

रफी एहमद किदवई एजुकेशन सोसायटी द्वारा 3 दिवसीय विज्ञान पर अधारित प्रशिक्षण का कार्यक्रम किया गया

स्वयं सेवी संस्था, रफी एहमद किदवई एजुकेशन सोसायटी द्वारा म.प्र. विज्ञान एवं प्रौघोगिकी परिषद (M.P. COST) के सहयोग से तीन दिवसीय विज्ञान पर अधारित प्रशिक्षण का कार्यक्रम किया गया जिसमें वेस्ट पेपर से खिलौने, घर के डेकोरेशन की वस्तुए बनाना, Craft Cuting and Origami के कई आईटम बनाना बच्चों को सिखाया गया। इन कार्यक्रमों में 5 विभिन्न शालाओं के 116 छात्र-छात्राओं ने तथा 2 मदरसों के 78 बच्चों ने भाग लिया।



इन कार्यक्रमों में माडल हा.से. स्कूल के प्रार्चाय का बहुत सहयोग रहा यह कार्यक्रम इसी शाला में किया गया। विज्ञान पर आधारित प्रश्र मंच में सही जवाब देने वाले बच्चों को प्रार्चाय एवं डा. गोरी शंकर शर्मा द्वारा पुरूस्कार वितरित किये गये।
संस्था अध्यक्ष डा. एस. आर. अली ने कहा कि में बहुत  अभारी हूँ।
(M.P. COST) एवं उसके मंत्री माननीय श्री पी.पी.शर्मा जी का जिन्होने शा. शालाओं के बच्चों के साथ मदरसों के बच्चों के हित में कदम उठाकर डेकोरेशन के आइटम बनाने के प्रशिक्षण हेतु इस संस्था को आदेशित किया।
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